ओशो के अनुसार सादगी के मुख्य पहलू:
• तुलना का अंत: जब आप तुलना बंद कर देते हैं, तो प्रतिस्पर्धा, हिंसा और ईर्ष्या समाप्त हो जाती है। सादगी में आप स्वयं को और दूसरों को वैसे ही स्वीकार करते हैं जैसे वे हैं।
• मन की शांति: ओशो के अनुसार, सादगी का मतलब है मन को समझना और उसे शांत करना, न कि उसे विचारों से भरना। यह एक 'अकर्ता' (non-doer) अवस्था है।
• वर्तमान में जीना: अतीत की यादों और भविष्य की कल्पनाओं से मुक्त होकर, जो अभी है, उसमें जीना ही सच्ची सादगी है।
• निर्दोषता (Innocence): सादगी का मतलब है बच्चे जैसी मासूमियत, जहाँ अहंकार (ego) का कोई स्थान न हो।
• सहजता: जो कुछ भी स्वाभाविक है, उसे अपनाना। ओशो के अनुसार, सत्य सरल है, और जटिलता अहंकार का निर्माण है।
ओशो अक्सर कहते थे कि सादगी ही वह तरीका है जिससे आप अस्तित्व (existence) के साथ एक हो सकते हैं, क्योंकि सत्य सादगी में ही प्रकट होता है।
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