जिद्दू कृष्णमूर्ति के अनुसार सच्ची आध्यात्मिकता किसी धर्म, गुरु, कर्मकांड या परंपरा का अंधा अनुसरण नहीं है, बल्कि यह स्वयं के मन और चेतना की गहरी समझ है।
आध्यात्मिकता के मुख्य विचार
सत्य और विश्वास: कृष्ण-मूर्ति कहते थे कि किसी भी बात पर आंख मूंदकर विश्वास करना सत्य को पाना नहीं है, बल्कि विश्वास हमेशा सच को खोजने में रुकावट बनता है।
मन की समझ: बाहरी ईश्वर या स्वर्ग की कल्पना करने से पहले हमें अपने खुद के उलझे हुए और बेचैन मन की गतिविधियों को समझना होगा।
स्वतंत्रता: उनके अनुसार स्वतंत्रता किसी नियम का पालन करने से नहीं मिलती, बल्कि वह तभी संभव है जब मनुष्य अपने सारे भय, पूर्वाग्रहों और पुरानी यादों से पूरी तरह मुक्त हो जाए।
गुरुओं का नकार: वे किसी भी प्रकार के पारंपरिक गुरु, धार्मिक संगठन या मध्यस्थ को भगवान या मोक्ष प्राप्ति का जरिया नहीं मानते थे। उनका मानना था कि व्यक्ति को अपना प्रकाश खुद बनना चाहिए।
जिड्डू कृष्णमूर्ति के अनुसार मन का खालीपन या मौन वह अवस्था है जहां विचारों का शोर शांत होता है, और इसी रिक्तता में जीवन की वास्तविक समझ और समस्याओं का समाधान संभव होता है।
मन के खालीपन का अर्थ
जब मन अतीत की स्मृतियों, भय और पूर्वाग्रहों से मुक्त होता है, तब वह खाली होता है।
मन भविष्य की चिंता या कल्पना में नहीं भटकता, बल्कि पूरी तरह वर्तमान में रहता है।
'मैं' और मेरेपन (अहंकार) का जाल जब कमजोर पड़ता है, तब रिक्तता आती है।
खाली मन का महत्व
पुराने विचारों के हटने से जो खालीपन बनता है, उसी मौन में कुछ नया और सहज घटित होता है।
जब भारी सोच से थककर मन शांत हो जाता है, तब उसी खालीपन में समाधान स्वतः मिल जाता है।
विचारों को जबरदस्ती रोकने से संघर्ष पैदा होता है; केवल बिना किसी निर्णय के मन की गतिविधियों को देखना ही ध्यान और शून्यता है।
जिद्दू कृष्णमूर्ति दुख को एक दुखद दुर्घटना के रूप में नहीं, बल्कि विचार, स्मृति और समय से जुड़ी एक स्व-निर्मित अवस्था के रूप में देखा।
उन्होंने सिखाया कि सच्चा दुख तभी समाप्त होता है जब हम उससे भागना बंद कर देते हैं और बिना किसी पूर्वाग्रह के उसका पूर्ण अवलोकन करते हैं, जिससे अंततः हमें गहन जुनून और ज्ञान प्राप्त होता है।
कृष्णमूर्ति ने कहा था कि "दुख विचार है, जो या तो अतीत की ओर जाता है या भविष्य की ओर।" जब हम शोक करते हैं, तो हम अतीत की यादों में खोए रहते हैं या किसी ऐसे व्यक्ति या वस्तु के बिना भविष्य की कल्पना करते हैं जिससे हम जुड़े होते हैं।
जब दुख आता है, तो मनुष्य तुरंत सांत्वना, मनोरंजन या दर्द को कम करने के लिए मनोवैज्ञानिक सहारे की तलाश करता है। कृष्णमूर्ति ने चेतावनी दी थी कि ये पलायन केवल अहंकार ("मैं") को मजबूत करते हैं और हमें अपने दुख की वास्तविकता से और भी दूर कर देते हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि दर्द से भागने के बजाय, व्यक्ति को पूरी तरह निष्क्रिय भाव से उस भावना का प्रत्यक्ष अवलोकन करना चाहिए। यदि आप दर्द की तीव्रता को बिना उसे बदलने की इच्छा किए देख सकते हैं, तो अंततः दर्द अपने आप समाप्त हो जाता है।
रोचक बात यह है कि कृष्णमूर्ति अक्सर इस बात पर जोर देते थे कि "जुनून" शब्द की जड़ दुख से जुड़ी है। मानवता के दुखों का गहराई से सामना करके और उन्हें अपने भीतर समाहित करके, व्यक्ति एक ऐसे अवैयक्तिक जुनून को खोजता है जो सच्ची रचनात्मकता के लिए आवश्यक है।
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• मछली (Fish Fillet): 500 ग्राम (पॉम्फ्रेट, रोहू या बिना कांटे वाली तिलापिया)
• नींबू का रस (Lemon Juice): 1 बड़ा चम्मच
• अदरक-लहसुन का पेस्ट (Ginger-Garlic Paste): 1 बड़ा चम्मच
• दही (Curd/Yogurt): 2 बड़े चम्मच (मैरिनेशन के लिए)
• मसाले: लाल मिर्च पाउडर (1 छोटा चम्मच), हल्दी (1/2 छोटा चम्मच), धनिया पाउडर (1 छोटा चम्मच), गरम मसाला (1/2 छोटा चम्मच)
• तेल (Oil): 2-3 बड़े चम्मच (मछली को ग्रिल या शैलो फ्राई करने के लिए)
• नमक (Salt): स्वादानुसार
बनाने की विधि (Instructions)
1. धोना और सुखाना: मछली के टुकड़ों को अच्छी तरह धो लें और किसी सूती कपड़े या टिशू पेपर से सारा पानी पोंछ लें।
2. पहला मैरिनेशन: मछली के टुकड़ों पर नींबू का रस, अदरक-लहसुन का पेस्ट और थोड़ा सा नमक लगाकर 10-15 मिनट के लिए रख दें.
3. दूसरा मैरिनेशन: एक अलग कटोरे में दही और सारे सूखे मसाले (लाल मिर्च, हल्दी, धनिया, गरम मसाला) को अच्छी तरह मिला लें। इस मिश्रण को मछली के टुकड़ों पर अच्छी तरह लगाएं. इसे 30-45 मिनट के लिए फ्रिज में रख दें.
4. ग्रिल या फ्राई करना:
• ग्रिल करने पर: ग्रिल पैन या ओवन को मध्यम आंच पर गरम करें। मछली पर थोड़ा सा तेल लगाएं और 170°C पर लगभग 20-25 मिनट तक दोनों तरफ से ग्रिल करें, जब तक कि वह सुनहरी न हो जाए।
• फ्राई करने पर: एक पैन में 2 चम्मच तेल गरम करें। धीमी आंच पर मछली को दोनों तरफ से तब तक पकाएं जब तक कि वह कुरकुरी न हो जाए।
is a healthy, tasty side dish. It pairs well with idli, dosa, or hot rice. To make it, roast lentils, garlic, and chilies in oil. Add the dill leaves and a little coconut. Cook until soft. Grind the mix with tamarind, salt, and water.
सामग्री (Ingredients)
• डिल के पत्ते (Soya/Sabbasige): 1 कप (बारीक कटे हुए)
• ताजा नारियल: आधा कप (कद्दूकस किया हुआ)
• चना दाल या उड़द दाल: 2 बड़े चम्मच
• हरी मिर्च: 2-3 (स्वाद के अनुसार)
• लहसुन: 3-4 कलियाँ
• इमली: छोटा टुकड़ा
• जीरा: आधा छोटा चम्मच
• तेल: 2 चम्मच
• नमक: स्वादानुसार
बनाने की विधि (Recipe)
1. पैन में 1 चम्मच तेल गरम करें 。
2. इसमें चना या उड़द दाल, जीरा और लहसुन डालें। इन्हें हल्का भूरा होने तक भूनें 。
3. हरी मिर्च और कटे हुए डिल के पत्ते डालें 。
4. पत्तों को 1-2 मिनट तक पकाएं जब तक कि उनका कच्चापन दूर न हो जाए 。
5. अब इसमें नारियल और इमली डालें। गैस बंद कर दें。
6. मिश्रण को ठंडा होने दें 。
7. इसे मिक्सी के जार में डालें। नमक और थोड़ा पानी डालकर पीस लें 。
8. आपकी स्वादिष्ट चटनी तैयार है। आप चाहें तो इसमें राई और करी पत्ते का तड़का भी लगा सकते हैं 。
सलक (स्नेक फ्रूट) के बारे में मुख्य तथ्य और जानकारी:
• नाम और उत्पत्ति: इसका वैज्ञानिक नाम Salacca zalacca है और यह ताड़ (Palm) परिवार से आता है。 यह मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया का मूल निवासी है。
• स्वाद और बनावट: इसके छिलके को हटाने पर अंदर सफेद या मलाईदार रंग की कलियाँ (लोब्स) निकलती हैं जो लहसुन की कलियों जैसी दिखती हैं。 इसका स्वाद मीठा, थोड़ा खट्टा और सेब या अनानास जैसा कुरकुरा होता है。
• "मेमोरी फ्रूट" (याददाश्त का फल): इंडोनेशिया में इसे "मेमोरी फ्रूट" भी कहा जाता है क्योंकि इसमें उच्च स्तर का पोटेशियम और पेक्टिन होता है, जो मस्तिष्क के स्वास्थ्य और याददाश्त को बढ़ाने में सहायक माना जाता है。
• विटामिन और खनिज: यह विटामिन C, आयरन, कैल्शियम, और फास्फोरस का एक अच्छा स्रोत है。 इसमें अधिकांश अन्य फलों की तुलना में 5 गुना अधिक बीटा-कैरोटीन होता है, जो आँखों की रोशनी के लिए बहुत फायदेमंद है。
• पाचन में सहायक: इसमें डायटरी फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने और कब्ज को रोकने में मदद करती है。 इसके अलावा, टैनिन से भरपूर होने के कारण यह डायरिया के इलाज में भी मदद कर सकता है。
• वजन प्रबंधन: यह फल कैलोरी में कम और ऊर्जा देने वाले कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है, जिससे यह स्नैक्स के रूप में एक स्वस्थ विकल्प बन जाता है。
डॉरमाउस के बारे में कुछ मुख्य और रोचक तथ्य इस प्रकार हैं:
गहरी नींद (शीतनिद्रा): ये जीव साल में 6 महीने (सर्दियों के मौसम में) गहरी नींद या हाइबरनेशन में बिताते हैं। इस दौरान इनका शरीर का तापमान और दिल की धड़कन बहुत कम हो जाती है।
नाम की उत्पत्ति: 'Dormouse' शब्द लैटिन भाषा के 'Dormire' शब्द से आया है, जिसका अर्थ 'सोना' होता है।
लंबा जीवनकाल: चूहों की
तुलना में इनका जीवनकाल काफी लंबा होता है। ये जंगल में 5 साल तक जीवित रह सकते हैं।
आवास: ये मुख्य रूप से यूरोप, एशिया और अफ्रीका के जंगलों और झाड़ियों में पाए जाते हैं। ये अपना ज्यादातर समय पेड़ों पर ही बिताते हैं।
आहार: ये सर्वाहारी (Omnivores) होते हैं। इनका मुख्य भोजन फल, जामुन, नट्स (जैसे हेज़लनट्स), फूल और कभी-कभी छोटे कीड़े होते हैं।
विशेष शारीरिक बनावट: इनकी बड़ी-बड़ी काली आंखें होती हैं जो रात में देखने में मदद करती हैं और इनकी पूंछ पूरी तरह से बालों से ढकी होती है (अन्य चूहों की तरह पूंछ नंगी नहीं होती)।
जिद्दू कृष्णमूर्ति के अनुसार समाज कोई अलग संस्था नहीं, बल्कि हम व्यक्तियों के आपसी संबंधों का ही विस्तार है。 उनका मानना था कि जब तक व्यक्ति अपने भीतर के लोभ, भय और अहंकार से मुक्त नहीं होता, तब तक बाहर से किसी भी तरह का सामाजिक या राजनीतिक सुधार संभव नहीं है。
• भिगोना: 150 ग्राम बीज रहित सूखे कोकम को 1 घंटे के लिए 2 कप गर्म पानी में भिगो दें।
• पीसना: भीगे हुए कोकम को उसी पानी के साथ ब्लेंडर में डालकर महीन पेस्ट बना लें।
• पकाना: एक पैन में कोकम का पेस्ट, 1 कप पिसा हुआ गुड़, 2 चम्मच कसा हुआ अदरक, 1 छोटा चम्मच भुना जीरा पाउडर, 1 छोटा चम्मच कश्मीरी लाल मिर्च पाउडर, 1 छोटा चम्मच काला नमक, हींग और सादा नमक डालें।
• तैयार: मध्यम आंच पर 5-7 मिनट तक पकाएं जब तक कि मिश्रण गाढ़ा न हो जाए। इसे ठंडा करके स्टोर करें।
खस्ता कचौड़ी चाट तैयार करने के लिए, खस्ता कचौड़ियों कचौरी को एक प्लेट में रखें और बीच में से थोड़ा तोड़ें। इसके ऊपर उबले हुए आलू, चने, और बारीक कटा प्याज डालें। अब इस पर फेंटा हुआ दही, हरी चटनी और इमली की मीठी चटनी डालें। अंत में, बारीक सेव, भुना जीरा पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, और चाट मसाला छिड़क कर परोसें।
• स्थापना: कंपनी का गठन 1857 में हुआ था, लेकिन शुरू में यह कार नहीं बनाती थी।
• पहली कार: वॉक्सहॉल नाम वाली पहली कार का निर्माण 1903 में हुआ था।
• नाम का इतिहास: कंपनी का नाम लंदन के एक क्षेत्र 'वौक्सहॉल' (Vauxhall) से आया है, जो 12वीं शताब्दी के फुल्क ले ब्रिएंट (Fulk le Breant) के घर 'फुल्क हॉल' से जुड़ा है।
स्वामित्व और विकास:
• जनरल मोटर्स: 1925 से, वॉक्सहॉल अमेरिकी दिग्गज कंपनी जनरल मोटर्स (General Motors) की सहायक कंपनी रही है।
• पीएसए विलय: 2017 में, वॉक्सहॉल को PSA ग्रुप (अब स्टेलेंटिस - Stellantis) ने खरीद लिया, जो फिएट क्रिसलर के साथ विलय के बाद दुनिया की चौथी सबसे बड़ी कार कंपनी बन गई।
उत्पादन और निर्माण:
• उत्पादन केंद्र: वॉक्सहॉल का एलेस्मेरे पोर्ट (Ellesmere Port) में एक सक्रिय वाणिज्यिक वाहन निर्माण संयंत्र है।
• प्रसिद्ध मॉडल: वॉक्सहॉल ने ब्रिटिश सड़कों के लिए कई लोकप्रिय कारें बनाई हैं, जिनमें विक्टर (Victor), कैवेलियर (Cavalier), और आधुनिक समय में कोर्सा (Corsa) और एस्ट्रा (Astra) शामिल हैं।
रोचक तथ्य:
• सीक्रेट शार्क: 2004 के बाद से, कंपनी अपनी कारों के इंटीरियर में एक गुप्त शार्क (secret shark) का निशान छिपाती आ रही है, जो एक मजेदार तथ्य है।
• शुरुआत: शुरुआत में, वॉक्सहॉल की कारें बहुत तेज़ और टिकाऊ मानी जाती थीं।
• रोजगार: यह कंपनी ब्रिटेन में हजारों लोगों को रोजगार प्रदान करती है।
वॉक्सहॉल आज भी ब्रिटेन में कारों और वाणिज्यिक वाहनों (vans) का एक बड़ा ब्रांड है।
इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस (IPF) एक गंभीर स्थिति है जिसमें फेफड़ों के ऊतक सख्त हो जाते हैं और उन पर निशान (scarring) पड़ जाते हैं। वर्तमान में इसका कोई पूर्ण इलाज नहीं है, लेकिन प्राकृतिक उपायों और जीवनशैली में बदलाव के जरिए इसके लक्षणों को प्रबंधित किया जा सकता है।
• सपनों का मतलब (Dreams): ओशो कहते हैं कि जब आप सोते हैं, तो मन सक्रिय रहता है, जिसे हम सपना कहते हैं। सपने आपके अधूरे दिनभर के विचारों, इच्छाओं और तनावों का प्रक्षेपण हैं।
• नींद का रहस्य (Sleep): अगर आप 8 घंटे सोते हैं, तो 6 घंटे सपने चलते हैं और केवल 2 घंटे ही वास्तव में स्वप्नहीन (deep sleep) नींद होती है।
• साक्षी भाव (Observation): जो लोग ध्यान करते हैं, वे नींद में भी साक्षी बने रहते हैं। ओशो के अनुसार, व्यक्ति का एक कोना हमेशा जागता रहता है, जो देखता है कि नींद कितनी गहरी है।
• नींद में ध्यान (Meditation in Sleep): ओशो ने "सचेत नींद" (conscious sleep) पर जोर दिया है। उनका मानना था कि यदि आप बहुत ज्यादा सोते हैं, तो नींद में भी जागरण का अनुभव किया जा सकता है।
• सपनों से मुक्ति: जब आप जीवन को बिना सपनों के, जैसा वह है, वैसा देखना शुरू करते हैं, तो सपने कम हो जाते हैं।
(Hindi: अलका याज्ञनिक, Bengali: অলকা ইয়াগনিক) is an Indian playback singer. She is noted in Hindi cinema with a career spanning over three decades. She is a record seven-time winner from a record of 36 nominations of the Filmfare Award for Best Female Playback Singer, a two-time recipient of the National Film Award as well as several other music awards & honours listed below. Further, as many as 20 of her tracks feature in BBC's "Top 40 Bollywood Soundtracks of all time" review. Read More : Click Here
• तुलना का अंत: जब आप तुलना बंद कर देते हैं, तो प्रतिस्पर्धा, हिंसा और ईर्ष्या समाप्त हो जाती है। सादगी में आप स्वयं को और दूसरों को वैसे ही स्वीकार करते हैं जैसे वे हैं।
• मन की शांति: ओशो के अनुसार, सादगी का मतलब है मन को समझना और उसे शांत करना, न कि उसे विचारों से भरना। यह एक 'अकर्ता' (non-doer) अवस्था है।
• वर्तमान में जीना: अतीत की यादों और भविष्य की कल्पनाओं से मुक्त होकर, जो अभी है, उसमें जीना ही सच्ची सादगी है।
• निर्दोषता (Innocence): सादगी का मतलब है बच्चे जैसी मासूमियत, जहाँ अहंकार (ego) का कोई स्थान न हो।
• सहजता: जो कुछ भी स्वाभाविक है, उसे अपनाना। ओशो के अनुसार, सत्य सरल है, और जटिलता अहंकार का निर्माण है।
ओशो अक्सर कहते थे कि सादगी ही वह तरीका है जिससे आप अस्तित्व (existence) के साथ एक हो सकते हैं, क्योंकि सत्य सादगी में ही प्रकट होता है।
Bhatt won the Filmfare Critics Award for Best Actress for playing a kidnapping victim in the road drama Highway (2014), and two Best Actress awards at the ceremony for playing a Bihari migrant in the crime drama Udta Punjab (2016) and a spy in the thriller Raazi (2018).