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गुरुवार, 26 मार्च 2026

नींद और सपने - ओशो

 






नींद और सपनों पर ओशो  के विचार (हिंदी में): 


• सपनों का मतलब (Dreams): ओशो कहते हैं कि जब आप सोते हैं, तो मन सक्रिय रहता है, जिसे हम सपना कहते हैं। सपने आपके अधूरे दिनभर के विचारों, इच्छाओं और तनावों का प्रक्षेपण हैं। 

• नींद का रहस्य (Sleep): अगर आप 8 घंटे सोते हैं, तो 6 घंटे सपने चलते हैं और केवल 2 घंटे ही वास्तव में स्वप्नहीन (deep sleep) नींद होती है। 

• साक्षी भाव (Observation): जो लोग ध्यान करते हैं, वे नींद में भी साक्षी बने रहते हैं। ओशो के अनुसार, व्यक्ति का एक कोना हमेशा जागता रहता है, जो देखता है कि नींद कितनी गहरी है। 

• नींद में ध्यान (Meditation in Sleep): ओशो ने "सचेत नींद" (conscious sleep) पर जोर दिया है। उनका मानना था कि यदि आप बहुत ज्यादा सोते हैं, तो नींद में भी जागरण का अनुभव किया जा सकता है। 

• सपनों से मुक्ति: जब आप जीवन को बिना सपनों के, जैसा वह है, वैसा देखना शुरू करते हैं, तो सपने कम हो जाते हैं। 





गुरुवार, 19 मार्च 2026

सादगी के मुख्य पहलू: ओशो

 



ओशो के अनुसार सादगी के मुख्य पहलू: 


• तुलना का अंत: जब आप तुलना बंद कर देते हैं, तो प्रतिस्पर्धा, हिंसा और ईर्ष्या समाप्त हो जाती है। सादगी में आप स्वयं को और दूसरों को वैसे ही स्वीकार करते हैं जैसे वे हैं। 

• मन की शांति: ओशो के अनुसार, सादगी का मतलब है मन को समझना और उसे शांत करना, न कि उसे विचारों से भरना। यह एक 'अकर्ता' (non-doer) अवस्था है। 

• वर्तमान में जीना: अतीत की यादों और भविष्य की कल्पनाओं से मुक्त होकर, जो अभी है, उसमें जीना ही सच्ची सादगी है। 

• निर्दोषता (Innocence): सादगी का मतलब है बच्चे जैसी मासूमियत, जहाँ अहंकार (ego) का कोई स्थान न हो। 

• सहजता: जो कुछ भी स्वाभाविक है, उसे अपनाना। ओशो के अनुसार, सत्य सरल है, और जटिलता अहंकार का निर्माण है। 


ओशो अक्सर कहते थे कि सादगी ही वह तरीका है जिससे आप अस्तित्व (existence) के साथ एक हो सकते हैं, क्योंकि सत्य सादगी में ही प्रकट होता है। 



शनिवार, 28 फ़रवरी 2026

मौन की शक्ति - ओशो


 


ओशो के अनुसार मौन के मुख्य पहलू: 

• आंतरिक संवाद बंद करें: मौन का अर्थ केवल मुँह बंद रखना नहींबल्कि मन की बड़बड़ाहट को भी रोकना है। 
• हृदय का मिलन (Communication of Hearts): जब दो लोग मौन में बैठते हैं (जैसे प्रेमी)तो एक-दूसरे की चेतना पर छा जाते हैंजिससे शब्दहीन संवाद होता है। 
• साधना का सार: मौन वास्तविक साधना हैजो शब्दों में नहींबल्कि आंतरिक सन्नाटे और जाग्रति में है। 
• आनंद और शांति: मौन में होना ही परमानंद (bliss) हैजहाँ चिंताएं और तनाव नहीं होते। 
• मन की शून्यता: मन एक बुलबुले की तरह हैइसे चुप कराकर ही भीतर के शून्य (Silence) तक पहुँचा जा सकता है।