रविवार, 20 सितंबर 2026

उत्तेजना - जिद्दू कृष्णमूर्ति

 



जिद्दू कृष्णमूर्ति  के अनुसार, उत्तेजना (stimulation) और सुख (pleasure) मन का वह तरीका हैं जिससे हम अपने भीतर के अकेलेपन, खालीपन और डर से भागने की कोशिश करते हैं। 

कृष्णमूर्ति के दर्शन में उत्तेजना के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं: 


• सच्चाई से पलायन: जब मन में शून्यता या बेचैनी होती है, तो हम उसे धार्मिक कर्मकांडों, मनोरंजन, विचारों या किसी भी प्रकार की उत्तेजना से भरना चाहते हैं। यह भीतर के खालीपन का सामना न करने की प्रवृत्ति है। 

• सुख और दुख का चक्र: कृष्णमूर्ति बताते हैं कि जहाँ उत्तेजना या सुख (pleasure) को पाने की लगातार खोज होती है, वहाँ अंततः दुख और पीड़ा भी आती है। किसी वस्तु, व्यक्ति या विचार से मिलने वाला रोमांच क्षणिक होता है। 

• क्षणिका आनंद बनाम विचार: आनंद (joy) और उत्सव तात्कालिक होते हैं, जिन्हें आमन्त्रित नहीं किया जा सकता। लेकिन जब हम उस आनंद को विचारों में पकड़कर रखना चाहते हैं, तो वह एक कृत्रिम उत्तेजना या सुख (pleasure) बन जाता है। 

• बिना भागे देखना: मुक्ति तब मिलती है जब इंसान बिना किसी भय या निंदा के अपनी उत्तेजना और खालीपन को वैसे ही देखता है जैसी वह है। जब उत्तेजनाओं से भागना बंद हो जाता है, तब मन शांत और जागरूक होता है।