आध्यात्मिकता
जिद्दू कृष्णमूर्ति के अनुसार सच्ची आध्यात्मिकता किसी धर्म, गुरु, कर्मकांड या परंपरा का अंधा अनुसरण नहीं है, बल्कि यह स्वयं के मन और चेतना की गहरी समझ है।
आध्यात्मिकता के मुख्य विचार
सत्य और विश्वास: कृष्ण-मूर्ति कहते थे कि किसी भी बात पर आंख मूंदकर विश्वास करना सत्य को पाना नहीं है, बल्कि विश्वास हमेशा सच को खोजने में रुकावट बनता है।
मन की समझ: बाहरी ईश्वर या स्वर्ग की कल्पना करने से पहले हमें अपने खुद के उलझे हुए और बेचैन मन की गतिविधियों को समझना होगा।
स्वतंत्रता: उनके अनुसार स्वतंत्रता किसी नियम का पालन करने से नहीं मिलती, बल्कि वह तभी संभव है जब मनुष्य अपने सारे भय, पूर्वाग्रहों और पुरानी यादों से पूरी तरह मुक्त हो जाए।
गुरुओं का नकार: वे किसी भी प्रकार के पारंपरिक गुरु, धार्मिक संगठन या मध्यस्थ को भगवान या मोक्ष प्राप्ति का जरिया नहीं मानते थे। उनका मानना था कि व्यक्ति को अपना प्रकाश खुद बनना चाहिए।