मन के खालीपन
जिड्डू कृष्णमूर्ति के अनुसार मन का खालीपन या मौन वह अवस्था है जहां विचारों का शोर शांत होता है, और इसी रिक्तता में जीवन की वास्तविक समझ और समस्याओं का समाधान संभव होता है।
मन के खालीपन का अर्थ
जब मन अतीत की स्मृतियों, भय और पूर्वाग्रहों से मुक्त होता है, तब वह खाली होता है।
मन भविष्य की चिंता या कल्पना में नहीं भटकता, बल्कि पूरी तरह वर्तमान में रहता है।
'मैं' और मेरेपन (अहंकार) का जाल जब कमजोर पड़ता है, तब रिक्तता आती है।
खाली मन का महत्व
पुराने विचारों के हटने से जो खालीपन बनता है, उसी मौन में कुछ नया और सहज घटित होता है।
जब भारी सोच से थककर मन शांत हो जाता है, तब उसी खालीपन में समाधान स्वतः मिल जाता है।
विचारों को जबरदस्ती रोकने से संघर्ष पैदा होता है; केवल बिना किसी निर्णय के मन की गतिविधियों को देखना ही ध्यान और शून्यता है।